मेरी गूँज (उपन्यास/NOVEL) 'मेरी गूँज' एक ऐसा उपन्यास जिसे पढ़ने वाला लगभग हर व्यक्ति अपनी झलक देख सकता है। For oder fill fill the link below मेरी गूँज (गुंजन राजपूत) Meri goonj written by Gunjan Rajput
कूप संसार या ऊँची उड़ान हमारी सीमाएँ कहाँ किसी ने तय की हमें तो असीमित आकाश में उड़ना था कल्पनाओं से ज़्यादा हमें आगे बढ़ना था फिर कैसे अचानक यहीं से-कहीं से किसी मेंढक ने प्रवेश किया कहीं से शुरू किया फिर सीमा बनाना अपने लोगों को आपस में भिड़ाना कहीं छोटी सी चिंगारी लगाकर फिर घी डाल-डाल आग लगाना कि इच्छा थी उसकी सभी कूप मंडूक बनेंगे देखें कि कैसे वो आगे बढ़ेंगे तब समझा नहीं कोई-जाना नहीं कोई उसका ये खेल पहचाना नहीं कोई फिर मेंढक ने अपने-से मेंढक बनाए काम था उनका कि कोई उड़ने न पाए कहीं आगे बढ़ता कोई देखा जाए करो पूर्ण प्रयास कि वहीं थम जाए बढ़ता हुआ गर देखो किसी को तभी तत्क्षण उसकी टाँग खींची जाए फिर क्या था……… मेंढकों की संख्याएँ बढ़ने लगी आकाश उड़ाने फिर घटने लगीं सभी ने फिर कूप को संसार माना ख़ुद को सीमित सा, संकुचित सा जाना अब क्या हाल है…… अब का हाल बहुत ही बुरा है सड़ा है, गला है या मर ही गया है सीलन-सी ज़िंदगी जिए जा रहे हैं...